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विविध पृष्ठभूमि के बालकों की पहचान|| अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चे|| समावेशी शिक्षा क्या होती है-bast ctet नोट्स 2020 ,ctet notes 2020

विविध पृष्ठभूमि के बालकों की पहचान- bast ctet नोट्स 2020 ,ctet notes 2020 

  निर्धन व पिछड़े वर्ग के बच्चे:- इस श्रेणी में बे बच्चे आते हैं । जो बहुत गरीब परिवार से होते हैं ।उनके लिए अपनी आजीविका चलाने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसलिए विशेष शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते।
इन स्थितियों को देखते हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू किया गया मध्यान भोजन स्क्रीन की भी शुरुआत की गई। जिसके अंतर्गत का छोटे बच्चे को भोजन की उचित व्यवस्था की गई जिसमें छोटे बच्चों को विद्यालय परिसर में ही भोजन की उचित व्यवस्था की गई।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चे

यह दोनों वर्ग ऐसे समुदाय हैं जिन्हें पूर्व से ही समाज से अलग रखा गया तथा उन्हें समानता का अधिकार नहीं दिया गया इस वर्ग के बच्चों को औपचारिक शिक्षा से दूर रखा जाता था। परंतु अब शिक्षा के अधिकार संबंधी नियमों के मुताबिक इन सभी बच्चों को भी उचित शिक्षा की व्यवस्था सरकारे करेंगी।

 विशेष प्रकार के बच्चे:- यह वह बच्चे होते हैं। जो सामान्य बच्चों से किन्ही कारणों की वजह से दिखने में योग्यता में भिन्न होते हैं। इन्हें दिव्यांगता की श्रेणी में रखकर अलग कर दिया गया।



 समावेशी शिक्षा क्या होती है

समावेशी शिक्षा ऐसी शिक्षा प्रणाली को कहते हैं ।जहां दिव्यांगता वाले बच्चे तथा बिना दिव्यांगता वाले बच्चे और अन्य सभी वर्गों के बच्चे एक ही कक्षा में एक साथ बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसे हम समावेशी शिक्षा कहते हैं। अर्थात साधारण शब्दों में कहें तो ऐसी शिक्षा प्रणाली जो समान रूप से सभी वर्ग के बच्चों को दी जाए। समावेशी शिक्षा कहलाती है ।समावेशी शिक्षा में सभी धर्मों को समान रूप से समान अधिकार दिया जाता है । समावेशी शिक्षा में किसी प्रकार के बच्चे से कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य:-

 👍सभी जाति गोबर गैस बनाने के बच्चों को समावेशन
करना

👍 सभी प्रकार के बच्चों को शिक्षा के  समान अवसर प्रदान करना

👍 निम्न स्तर के बच्चों के स्तर में सुधार लाना

👍 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना
👍 गरीब वर्ग को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करना

👍 बच्चों को समानता का अधिकार संबंधी जानकारी प्रदान करना

👍 सभी प्रकार के धर्मों को एक साथ शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना


दिव्यांग तथा अधिगम आ सकता वाले बालकों की पहचान।Ctet स्पेशल नोट्स 2020


दिव्यांग वालक:  क्रो एंड क्रो के अनुसार ऐसे बालक जिनमें ऐसा शारीरिक दोष होता है जो किसी भी रूप में उसे साधारण क्रियाओं में भाग लेने में रोकता है या उसे सीमित रखता है ऐसी बालक को हम दिव्यांग वालक कहते हैं।
 दिव्यांग बालक कई प्रकार के होते हैं। दिव्यांग बालक को हम आगे की पोस्ट में कवर करेंगे। फिलहाल हम आपको शार्ट तरीके से बताएंगे।

 दिव्यांग बालकों के अंतर्गत निम्न प्रकार के बालक भी आते हैं ।जैसे आंख से विकलांग ,बालक टांग से विकलांग ,बालक हाथ से विकलांग बालक या शरीर के अन्य भागों से विकलांग बालक 
बच्चों की विकलांगता संबंधी क्रिया को सरल बनाने के लिए विद्यालय में विकलांग बच्चों के लिए उचित व्यवस्था की जाती है।  इसमें जो बच्चे आंख से नहीं देख पाते उनके लिए और जो बच्चे ठीक प्रकार से चल नहीं पाते उनके लिए भी उचित व्यवस्था की जाती है। जिसके माध्यम से विकलांग बच्चों के लिए एवं उनकी सरलता के लिए कई प्रकार के साधन विद्यालय प्रशासन द्वारा और सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं।

जिससे कि छात्रों को किसी प्रकार की कोई समस्या न हो और   बच्चों की शिक्षा में किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई उत्पन्न ना हो। वर्तमान में एनसीईआरटी ने सर्व शिक्षा अभियान और मध्यान भोजन वितरण योजना और निशुल्क पुस्तक वितरण योजना के द्वारा बच्चों के लिए भोजन की खाने पीने की और सभी प्रकार के बच्चों के लिए पढ़ने की उचित व्यवस्था की है। उचित कदम उठाए हैं। और ऐसा करने के लिए सरकारों को भी प्रेरित किया है। 1992 से  अब तक कई प्रकार के शिक्षा संबंधी बदलाव आए हैं।जिसे सरकारों ने पूरी तरह से मान्यता दी है।एनसीआरटी और और राज्य सरकार मिलकर शिक्षा संबंधी नए कार्यों को एवं शिक्षा संबंधी शिक्षकों की कमी को एवं शिक्षा के मापदंडों को देखकर शिक्षा की उचित व्यवस्था करती हैं। इसमें राज्य सरकारों को केंद्र सरकार को एनसीटीई निर्देश देता है।


 सर्व शिक्षा अभियान:- इस अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य राज्यों में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा का प्रावधान किया गया इसमें 6 से 14 वर्ष के हर एक बच्चे को शिक्षा प्रदान करने के लिए विद्यालय में एडमिशन कराए जाने की बात कही गई इस अभियान का मुख्य मकसद यही था कि इसमें 6 से 14 वर्ष के हर एक बच्चे को शिक्षा मिले और वह पूर्ण रूप से शिक्षित हो इस अभियान के आने से शिक्षा में काफी बदलाव आए और ग्रामीण क्षेत्र में भी काफी बड़ा बदलाव देखने को मिला अब सरकार ने दूरी के हिसाब से प्राथमिक विद्यालयों और जूनियर प्राथमिक विद्यालयों को खोलना आरंभ किया इन विद्यालयों को खोलने के लिए सरकार ने एक या 2 किलोमीटर की दूरी के मानक रखें थे।

मध्यान भोजन वितरण योजना:-

 किस में कक्षा एक से कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए उचित भोजन की व्यवस्था की गयी। इस योजना का मकसद गरीब बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाया था ।और जो बच्चे परिवारिक रुप से बहुत ज्यादा गरीब है उनको शिक्षा से जोड़ना था ताकि वह बच्चे विद्यालय आने के लिए प्रेरित हो इस योजना के माध्यम से शिक्षा में काफी आमूलचूल परिवर्तन हुए वर्तमान में भी यही योजना प्रदेश भर में और देश के अन्य राज्यों में चल रही है इस योजना का मुख्य मकसद गरीब बच्चों के लिए भोजन की उचित व्यवस्था करना था।और इसी के साथ साथ वह पढ़ाई भी कर सकते थे।


निशुल्क पुस्तक वितरण योजना:- 

निशुल्क पुस्तक वितरण योजना छात्रों के लिए सभी प्रकार की किताबों को मुफ्त वितरित करने की योजना थी जिसमें हिंदी  कलरव और गिनतारा मैथ के लिए रेनबो इंग्लिश के लिए आदि सभी विषयों की पुस्तकों का निर्माण किया गया और छात्रों के लिए इन पुस्तकों को मुफ्त में प्रदान किया गया। निशुल्क पुस्तक वितरण योजना से देशभर के बच्चों को क्या फायदा हुआ और बच्चों को शिक्षा के लिए क्रेजी भी किया गया।



 नोट:- वर्तमान में प्राथमिक और जूनियर स्तर के छात्रों के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार सर्दियों में स्वेटर जूता और ड्रेस की उचित व्यवस्था करती है। देखा जाए तो सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए हर एक चीज मुफ्त में कर रखी है लेकिन फिर भी शिक्षा का स्तर सुधर नहीं रहा है खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में

       

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