Recents in Beach

अनुवांशिकता एवं वातावरण || पारिवारिक वातावरण ||ctet ,tet nots|| टेट ,सीटेट नोट्स

अनुवांशिकता एवं  वातावरण || आनुवंशिकता का अर्थ क्या है|| आनुवंशिकता और बच्चे के विकास पर पर्यावरण के प्रभाव

आनुवंशिकता का अर्थ क्या है।
माता-पिता तथा पूर्वजों के गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाना ही अनुवांशिकता या वंशानुक्रम कहलाता है।
इस प्रक्रिया के अध्ययन को आनुवंशिकी कहते हैं।
आनुवंशिकता और पर्यावरण के सापेक्ष महत्व:
वंशानुक्रम में वे सभी शारीरिक बनावट ,शारीरिक विशेषता क्रियाएं या क्षमताएं सम्मिलित रहती हैं। जिनको वह व्यक्ति अपने माता-पिता या पूर्वजों से प्राप्त करता है।
अनुवांशिकता को स्थिर सामाजिक संरचना माना जाता है। मानव कोष में 23जोड़े गुणसूत्र अर्थात कुल 46 गुणसूत्र होते हैं ।इनमें से प्रत्येक पर हजारों लगभग ,तीन हजार की संख्या में जींस पाए जाते हैं ।इन्हीं जींस के द्वारा माता-पिता की विशेषताएं बच्चों तक पहुंच जाती है।

साधारण शब्दों में अनुवांशिकता वह प्रक्रिया होती है। जिसमें माता पिता के गुण उसकी औलाद में पहुंच जाते हैं।
 जैसे कि किसी की आंख में तिल है ,तो उसके बेटे में भी तिल हो सकता है, या किसी औरत के बाल घुंघराले हैं । तो उसके बेटे या बेटी के भी बाल घुंघराले या उसकी तरह हो सकते हैं ।
बी कंडीशन में पाया गया है । कि एक व्यक्ति के पैर में चोट के निशान थे। तब अध्ययन में पाया गया कि उसके पैदा न होने वाले बच्चे के पैर में भी निशान पाए गए थे ।अर्थात कह सकते हैं कि अनुवांशिकता के द्वारा ही माता पिता के गुण बच्चे तक पहुंचते हैं।

अनुवांशिकता का प्रभाव|| वंशानुक्रम और वातावरण का महत्व

1. अनुवांशिकता का सबसे गहरा प्रभाव शारीरिक बनावट पर पड़ता है ।जैसे की लंबाई, स्वास्थ्य ,रंग ,बाल आंखों का रंग आदि सबकुछ अनुवांशिकता पर ही निर्भर होता है।

2. बुद्धि पर प्रभाव :-तीव्र बुद्धि वाले माता-पिता की संतान तीव्र बुद्धि की तथा कम बुद्धि वाले माता-पिता की संतान कम बुद्धि की हो सकती है ।
ऐसा अध्ययन में भी साबित हो चुका है।कि जिस व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है। तो उसके माता-पिता की बुद्धि या उसके पूर्वजों की बुद्धि भी तेज रही होगी।

3.व्यक्तित्व पर प्रभाव:- किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की कल्पना उसके व्यवहार का आकलन करके ही की जा सकती है । अर्थात किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व उसकी आनुवंशिकता पर भी निर्भर करता है। के माता पिता का व्यवहार और व्यक्तित्व अच्छा होगा तो उसकी संतान पर भी इसका फर्क साफ-साफ दिखेगा।

इनके अलावा इन सभी क्षेत्रों में वातावरणीय प्रभाव भी अपनी भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा सोचने समझने की क्षमता, कार्य करने का तरीका, चलने का तरीका ,बात करने का तरीका, व्यवहार आदि भी आनुवंशिक गुणों के आधार पर ही होते हैं।

दोस्तों ऊपरवाले  आर्टिकल में हमने आपको बताया कि अनुवांशिकता क्या होती है ,अनुवांशिकता का प्रभाव किस प्रकार पड़ सकता है। हमने बहुत ही सरल शब्दों में आपको अनुवांशिकता को बताने का समझाने का प्रयत्न किया है ।उम्मीद है कि आप अनुवांशिकता को भलीभांति समझ गए होगे । अब बात करते हैं। वातावरण की यह बात अगर होता क्या है।

वातावरण का अर्थ|| विद्यालय वातावरण का अर्थ

वातावरण से तात्पर्य हमारे चारों ओर ,जो कुछ भी है ।
जैसे प्राणी ,मनुष्य ,परिवार, समाज ,जलवायु ,वनस्पति पेड़, पौधे ,पहाड़, नदियां ,सामाजिक परिस्थितियां सब कुछ वातावरण के अंतर्गत ही आता है।

वातावरण का प्रभाव
1 .शारीरिक लक्षण:गर्म क्षेत्रों में रहने वाले लोग काले आलसी होते है।  तथा ठंडे क्षेत्रों में रहने वाले लोग गोरे तथा परिश्रमी होते हैं। यह बात अलग के विभाग का ही उदाहरण है। यह उन्हें अध्ययन कहता है।

२. बुद्धि पर प्रभाव:अनुवांशिक गुण अच्छे होने पर भी यदि वातावरण अच्छा नहीं मिलता तो बुद्धि कम हो सकती है। इसलिए अच्छे विकास के लिए अनुवांशिकता के साथ-साथ अच्छा वातावरण भी अति आवश्यक होता है।
नोट नंबर दो पॉइंट सीटेट की पिछली परीक्षा में पूछा जा चुका है इसलिए इस प्रश्न को अच्छे से याद कर ले यह एक नोटबुक में इसको लिख ले।

३. व्यक्तित्व प्रभाव 
४ .शिक्षा पर प्रभाव 
५.मानसिक विकास पर प्रभाव 
५.स्वास्थ्य पर प्रभाव

इसी प्रकार सभी तत्वों पर वातावरण का प्रभाव पड़ता है बालक जिस वातावरण में रहता है उसका विकास जी उसी प्रकार से प्रभावित होता है।

दोस्तों अभी तक हमने आपको पहले अनुवांशिकी और  बाद में वातावरण को भलीभांति स्पष्ट शब्दों में आपको बता दिया है। दोस्तों आपने देखा कि वातावरण और अनुवांशिकता आपस में एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
 की परीक्षा में एक प्रश्न इस प्रकार आया था ।परीक्षा में पूछा गया था । कि क्या अनुवांशिकता और वातावरण में संबंध होता है ।ऑप्शन के पारस्परिक या आपारस्परिक
चलिए मित्रों आप बताइए कि इसका ऑप्शन क्या होगा ।इसका सटीक आंसर होगा "पारस्परिक "
 क्योंकि अनुवांशिकता और वातावरण एक दूसरे के ऊपर ही डिपेंड करते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

अब हम आपको परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण बिंदु बताने जा रहे हैं इन दिनों को हो सके तो अपनी नोटबुक कॉपी करना है। यह सभी बिंदु परीक्षा में आ चुके हैं।

१ बालक का विकास आनुवंशिकता एवं वातावरण की प्रक्रिया का ही परिणाम होता है।

२ अनुवांशिकता एवं वातावरण एक दूसरे के पूरक होते हैं।

३. आनुवंशिकता तथा वातावरण किस प्रकार संबोधन की अलग करना असंभव होता है।

४. बातों पर होती है प्रत्येक विकास खंड अनुवांशिकता तथा वातावरण का निर्माण अति आवश्यक है।

 नोट:- जब भी एग्जाम में इस प्रकार के ऑप्शन में किए गए हो तो आप क्या चुनेंगे।

केवल आनुवंशिकता का
पालन पोषण और शिक्षा का
अनुवांशिकता एवं एवं वातावरण  का
या केवल वातावरण का

इस प्रकार के त उत्तर प्रदेश करके समय आप केवल सबसे लंबे वाले ऑप्शन पर ही मारेंगे जिसमें तीनों दिशाओं में सोचा गया हो अर्थात इसमें अनुवांशिकता एवं वातावरण होगा।

दोस्तों हमें आपको इस पोस्ट में अनुवांशिकता और वातावरण के बारे में स्पष्ट रूप से बताया है ।अगर आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी है तो कृपया अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कीजिए और हमसे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को भी लाइक कर दीजिए धन्यवाद 

Post a Comment

0 Comments