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संज्ञान तथा संवेग किसे कहते है || संवेग के प्रकार|| बच्चा एक समस्या समाधान तथा एक वैज्ञानिक अन्वेषण के रूप में|| समस्या समाधान विधि के सोपान


 संज्ञान तथा संवेग क्या है। संवेग कितने प्रकार का होता है -ctet  2020 notes in hinde 

 संज्ञानात्मक विकास:- संज्ञान से तात्पर्य एक ऐसी प्रक्रिया से होता है। जिसमें संवेदन, प्रत्यक्षण, प्रतिमा, धारणा ,समस्या समाधान ,चिंतन, तर्पणा जैसी मानसिक क्रियाएं सम्मिलित होती है।

 अतः संज्ञान से तात्पर्य बालकों में किसी संवेदी सूचना को ग्रहण करके उस पर चिंतन करने तथा क्रमिक रूप से उसे इस लायक बना देने से होता है। जिसका प्रयोग विभिन्न परिस्थिति में करके ,वह तरह - तरह की समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकें।

 संवेग क्या होता है।

संवेग को अंग्रेजी भाषा में इमोशंस कहते हैं यह लैटिन भाषा के एम वेट शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है उत्तेजित करना अर्थात संवेग व्यक्ति की उत्तेजित अवस्था का ही दूसरा नाम होता है।

गेलडार्ड के अनुसार:- संवेग क्रियाओं का उत्तेजक रूप है। लेकिन संवेग में सिर्फ उत्तेजित अवस्था ही नहीं होती बल्कि कुछ और भी प्रक्रियाएं होती है। 

संवेग के प्रकार:- संवेगों के प्रकार को बताने से पूर्व हम आपको, संवेग के विषय में कुछ और जानकारी देना चाहते हैं।


 क्रोध -साधारण भाषा में हम देखें ।तो यदि कोई व्यक्ति किसी कार्य को करता है।और कोई दूसरा व्यक्ति उस उसी कार्य को उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध करने का प्रयाश करता है। या उस कार्य को उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध कार्य करने का प्रयास करता है। तो उस व्यक्ति को क्रोध आ जाएगा। 
जिससे वह उसके साथ गलत व्यवहार भी कर सकता है। दरअसल यह है। व्यक्ति के अंदर मौजूद संवेग का ही उदाहरण है। गुस्सा ही एक प्रकार का संवेग होता है। हमने आपको यह उदाहरण केवल इसलिए बताया क्योंकि इससे आप बहुत ही आसानी से संवेग के विषय में जानकार हो जाएंगे।

 प्रेम - प्रेम भी एक प्रकार का  संवेग ही होता है।
 प्रेम में , कोई व्यक्ति जब अपने माता पिता भाई बहन पति पत्नी या कोई अन्य व्यक्ति से कुछ प्रेम पूर्वक वार्तालाप करता है
या उनके विषय में वह किसी दूसरे आदमी से इधर उधर की बात नहीं सुन सकता हो वही वास्तव में एक प्रेम होता है इसी प्रेम को हम संवेग कहते है।

डर:-डर भी  एक संवेग का ही उदाहरण है। जब कोई व्यक्ति चीज के बारे में पहले से भी परिचित होता है ।और उसके बारे में भली भांति जानता है।तो वह  उसके रूप को देखकर  कभी-कभी डर जाता है ।
जैसे कि हम देखते हैं कि साहब को देखकर हम डर जाते हैं कहीं गए हम पर हमला ना कर दे और हम को काट नहीं लें यह एक संवेग ही होता है।
हर्ष:- जब कोई व्यक्ति को किसी भी कार्य में सफलता मिलती है या उसकी कोई मनोकामना पूर्ण होती है तो वह मन ही मन हर्ष में होता है अर्थात प्रसन्न मुद्रा में होता है। इसी प्रक्रिया में हर एक संवेग होता है।


दुःख- दुख भी एक संवेग,का उदाहरण है। जब कोई व्यक्ति मन ही मन परेशान होता है। या किसी चीज को लेकर उदास होता है। तब उसके अंदर दुख होता है। यह दुखी एक संवेग है। जब किसी व्यक्ति के कोई प्रियजन या कोई परिवार का सदस्य उसको छोड़ कर चला जाता है। या कोई प्रिय वस्तु उसे छोड़ कर चली जाती है।तो उसको दुःख का अनुभव होता है।इसी दुख में ही संवेग छिपा होता है।

उत्सुकता:- उत्सुकता भी एक प्रकार का संवेग ही है। जब कोई व्यक्ति किसी अपरिचित वस्तु के जानने के विषय को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुक हो। तब वह उत्सुकता के कारण ही किसी भी अपरिचित चीज को जल्दी ही जानने का प्रयास करता है।

ईष्या:- जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से अंदर ही अंदर जलता रहता है। तो यह संदेह उत्पन्न होता है।दरअसल यह उत्पन्न होता तो ईष्या का होना लाजिमी है। कि जब हम देखते हैं।
कि कोई व्यक्ति हमसे परीक्षा में अधिक अंक ले आए। या हम से अधिक अच्छी नौकरी लग जाए, या हम से अधिक पैसे वाला हो जाए तो ,यह संवेग उत्पन्न हो जाता है।

 भूख :- भूख भी एक प्रकार का संवेग ही होता है। जब भी किसी व्यक्ति को भूख लगती है तो वह खाने पीने की वस्तुओं का सेवन करता है जिससे उसके पेट में भोजन की जिज्ञासा शांत हो जाती है तब जाकर भूख नाम का संवेग को उसकी प्राप्ति हो जाती है।

आश्चर्य:- जब भी किसी व्यक्ति को किसी ,प्रकार को किसी प्रकार की  आवश्यकता होती है परंतु उस आवश्यकता का पूर्ण ना होने की स्थिति में व्यक्ति को आश्चर्य नाम का संदेश उत्पन्न होता है वह सोचता है की उस कार्य को किया क्यों नहीं गया।

 मित्रों अब हम आपको सभी प्रकार के संवेगो के बारे में एक सूची देंगे:-



क्रोध 
प्रेम 
डर
हर्ष
दुख 
उत्सुकता 
जलन 
करुणा 
आत्महीनता 
भूख 
आमोद
आश्चर्य 
आत्महीनता 
आदि
यह संवेगों के मुख्य भाग हैं। परीक्षा की दृष्टि से यही संवेग परीक्षा में पूछे जाते हैं


बच्चा एक समस्या समाधान तथा एक वैज्ञानिक अन्वेषण के रूप में

   बच्चा एक समस्या समाधक के रूप में :- बच्चे का यह कौशल आयु व अनुभव के साथ साथ बढ़ता रहता है।किशोर अवस्था में बालक समस्या का समाधान करने योग्य बन जाता है। बच्चे की जीवन में अनेक समस्याएं आनी शुरू हो जाती हैं।तथा उन्हें उसको स्वयं ही हल करना होता है। बच्चे के इस कौशल को बढावा देने के लिए,से को बढ़ावा देने के लिए शिक्षक उसकी सहायता कर सकता है।

समस्या समाधान विधि के सोपान:-

-ctet  2020 notes in hinde 



1.समस्या को समझना

2. संबंधित आंकड़ों को इकट्ठा करना

3. क्रियान्वयन करना
4.निष्कर्ष पर पहुंचना 

5.मूल्यांकन करना

note:- ऊपर दिए गए समस्या समाधान विधि के सोपान सीटेट की परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं अतः इन प्रश्नों को क्रम से ही याद किया जाता है। अतः सीटेट की परीक्षा में यह प्रश्न कई बार आया है ।और इस प्रश्न को हल करते समय इसको क्रम से ही याद करें।



बच्चा एक वैज्ञानिक अन्वेषण के रूप में

यह भी एक समस्या समाधान से संबंधित होता है।इसमें जब बच्चा की समस्या को हल करने के लिए अपने अनुभव तथा ज्ञान का प्रयोग करता है। तो वह समस्या के समाधान खोज लेता है।

 इस दौरान में है नए नियम में नए सिद्धांतों की भी खोज करना सीख जाता है। तथा नए ज्ञान का निर्माण करता रहता है। अतः वह धीरे-धीरे नई समस्याओं का समाधान भी स्वयं ही करना सीख जाता है।

 इसके द्वारा बच्चे के अंदर मानवीय मूल्यों का निर्माण भी होता है। इसके द्वारा बच्चा आगे के जीवन में अपने कार्यों में इन मानवीय मूल्यों का प्रयोग करता है। ऐसे बच्चे के चरित्र में भी कई परिवर्तन आ जाते हैं।

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