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प्रतिभाशाली बच्चे और सृजनात्मकता || पिछले बालक क्या होते हैं। मंदबुद्धि बालक क्या होते हैं|| समस्यात्मक बालक--ctet 2020 notes


 प्रतिभाशाली बच्चे और सृजनात्मकता-ctet 2020 notes 
 विशिष्ट बालक:- विशिष्ट बालकों को दो श्रेणियों में रखा जाता है।


ctet 2020 notes


1. उच्च उपलब्धि वाले विशिष्ट बालक
 👍प्रतिभाशाली बालक
 👍सृजनात्मक बालक

 2.निम्न बुद्धि वाले  विशिष्ट बालक
👍 मंदबुद्धि बालक
👍 पिछड़े बालक

प्रतिभाशाली बालकों की पहचान
👍 इनकी बुद्धि लब्धि 140 से अधिक होती है

👍 इनकी मानसिकता में तीव्रता होती है और यह किसी भी परिस्थिति में बहुत ही तीव्र गति से सोच रखने की क्षमता रखते हैं।

👍 मौलिक चिंतन की क्षमता होती है।इस प्रकार के बालकों में तुरंत मौलिक चिंतन करने की वास्तविक क्षमता होती है।यह तुरंत मौलिक चिंतन कर लेते हैं।

👍 उच्च  उपलब्धियां, प्रतिभाशाली बच्चों की कुछ उपलब्धियां होती हैं। और वह इन्हें प्राप्त करने के लिए अधिक कठिन परिश्रम करते हैं।

👍 प्रतिभाशाली बच्चों का विशाल शब्दकोश होता है ऐसे बच्चों में वाणी द्वारा बोले गए शब्दों का वर्गीकरण भी अच्छा होता है ऐसे बच्चे, साधारण बच्चों की तुलना में अधिक सक्रिय और अधिक शब्दों को बोल सकते हैं।

👍 बुद्धि एवं व्यवहारिक ज्ञान का अधिक होना प्रतिभाशाली बच्चों में सामान्य तौर पर देखा जाए, तो ऐसे बच्चों की व्यवहारिक बुद्धि और शब्दों का ज्ञान तथा कार्य करने की क्षमता साधारण बच्चों से अधिक और बहुत तेजी से करने की क्षमता होती है।

👍 अत्यंत जिज्ञासु प्रवृत्ति, प्रतिभाशाली बच्चों की अत्यंत जिज्ञासु प्रवृत्ति होती है। ऐसे बच्चे सवाल जवाब अधिक करते हैं। और वह हर एक कार्य में कोई न कोई प्रश्न अच्छे से ढूंढ लेते हैं ।और जब तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल जाता मैं शांत नहीं बैठते। 
जैसे:- चांद इतनी दूर क्यों है ,इस पर कैसे जाएंगे, इस पर सबसे पहले कौन गया। आदि  विषय के बारे में जब तक संपूर्ण जानकारी इनको प्राप्त नहीं होगी। वह तब तक  इनके विषय में पूछते रहते हैं।

👍 सामान्य अध्ययन में रुचि का होना ऐसी बच्चों में सामान्य तौर पर देखा जाए ।तो ऐसे बच्चे हर एक कार्य को एक अपने अंदाज में ही करते हैं। वह हर कार्य को सरल रूप में करने के लिए कुछ न कुछ नई- नई खोज करते रहते हैं। और वह अपने द्वारा अलग ही ढंग से उस कार्य को करने के लिए आगे बढ़ते है।

👍 सृजनात्मक बच्चों में उच्च स्तर का संज्ञानात्मक विकास व मानसिक विकास होता है ।इनमें नॉर्मल बच्चों की भांति विकास ना होकर उनका विकास तेजी से होता है।

👍 सृजनात्मकता वाले बच्चे अपने साथियों की तुलना में अधिक ज्ञान रखते हैं। और इस प्रकार के बच्चे अपने साथी से अधिक कार्य करने की क्षमता रखते हैं। और वह अपने साथियों से अधिक अलग तरीके से किसी भी कार्य करने को करने की क्षमता रखते हैं।अर्थात वह अपने कार्य को कुछ नए अंदाज में करते हैं।

👍  इस प्रकार के बच्चों की सबसे खास बात यह होती है ,कि यह बच्चे प्रश्नों के उत्तर तुरंत देते हैं। अगर उनसे कोई प्रश्न नहीं आता है। तुम्हें कुछ प्रश्न के बारे में कुछ ना कुछ अपने दिमाग का प्रयोग करके उसका  उत्तर देने की कोशिश करते हैं। अपने अनुसार उत्तर का चयन भी कर सकते हैं।

सृजनात्मकता वाले बालकों की पहचान करना
 सृजनात्मकता वाले बच्चों की पहचान निम्न बिंदुओं को देखकर तुरंत की जा सकती है।

👍 ऐसे बच्चों की बुद्धि लब्धि 120 से 140 के आसपास होती है।

👍 ऐसे बच्चों का सृजनात्मक चिंतन होता है।

👍 ऐसे बच्चे हमेशा क्रियाशील रहते हैं।

👍 सृजनशील बालकों का दृष्टिकोण सामान्य व्यक्तियों से भिन्न होता है।और वह अपने सृजनात्मक चिंतन के अनुसार किसी भी विषय को अपने ही दृष्टिकोण से देखते हैं।

👍 संवेदनशील प्रक्रिया भी ऐसे बच्चों में अधिक होती है

👍 ऐसे बच्चे किसी भी समस्या का समाधान तुरंत कर लेते हैं। चाहे वह किसी भी परिस्थिति में भी क्यों ना हो। उसका हल तुरंत वह अपनी अनुसार निकाल लेंगे।

👍 स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना, ऐसे बच्चे तुरंत ही स्वतंत्र रूप से किसी भी कार्य को करने के लिए निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं।

👍 ऐसे बच्चों में हमेशा नवीनतम विचारों का समावेश उनके जीवन से जुड़ा होता है वह हमेशा किसी भी कार्य को करने के लिए कुछ नया करने की क्षमता रखते हैं।

👍 ऐसे बच्चे हमेशा नए नए कार्यो में अधिक रुचि लेते है। और वह खेलकूद आदि में भी अधिक सक्रिय रहते हैं।

👍 ऐसे बच्चे विद्यालय परिसर में भी अपने शिक्षक के लिए अधिक प्रेम प्रिय होते हैं क्योंकि वह शिक्षक की हर एक भूमिका में अपने आप को आगे रखने की कोशिश करते हैं।

 👍ऐसे बच्चे अपने विद्यालय की खेल क्रिया में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हैं.वह अपने विद्यालय में होने वाले हर एक क्रियाकलाप में अपना अवश्य योगदान देते हैं।और वह हर क्रिया में सम्मिलित होने की क्षमता रखते हैं।इस प्रक्रिया में है हमेशा अव्वल आने की क्षमता रखते हैं।
 समस्यात्मक बालक

 पिछले बालक क्या होते हैं।ctet 2020 notes 
वे छात्र जो अपने आयु वर्ग के बच्चों की अपेक्षा शैक्षिक उपलब्धि में पीछे रह जाते हैं। पिछडे वालक कहलाते हैं। इसके मानसिक, शारीरिक या सामाजिक कारण होते हैं। पिछडे बालक को पिछड़ने का प्रमुख कारण उनका परिवार भी हो सकता है ।क्योंकि बच्चे को जैसा परिवार में व्यवहार आदि मिलता है बच्चे पर भी उसका व्यवहार ऐसा ही पड़ता है 
दूसरा प्रमुख कारण बच्चे का स्वास्थ्य है ।किसी किसी बच्चे को बचपन से ही किसी बड़ी बीमारी ने घेर लिया होता है ।तो वह पूर्ण रुप से दूसरे बच्चों की भारती कार्य नकल नहीं कर पाता और वह पिछड़ जाता है।और 

तीसरा कारण होता है सामाजिक इसमें भी व्यक्ति जिस संगत में रहता है। अर्थात जैसा वह समाज में देखता है वैसा ही कार्य करता है ।अगर वह किसी गलत संगत में पड़ जाता है तो वह हमेशा गलत ही कार्य करेगा इसलिए वह दूसरे बच्चों की भांति अपने कार्य में पिछड़ जाता है। इन सब बच्चों पर समाज का बहुत ज्यादा गहरा प्रभाव पड़ता है।

 मंदबुद्धि बालक क्या होते हैं:- मंदबुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 90 से कम होती है अर्थात इन्हीं बच्चों को हम मंदबुद्धि बालक कहते हैं इनका शैक्षणिक सामाजिक और भाषा विकास निम्न होता है।


 समस्यात्मक बालक:- बे बालक जिनका व्यवहार सामान्य रूप से होता है तथा समाज द्वारा अस्वीकृत होता है वह बच्चे ही समस्या तक बच्चे कहलाते हैं

 इन बच्चों में चोरी करने वाले बच्चे ,झूठ बोलने वाले बच्चे ,विद्यालय से भाग जाने वाले , बीड़ी सिगरेट या   अन्य प्रकार के धूम्रपान का सेवन करने वाले बच्चे।

 बाल अपराध क्या है:- इसके अंतर्गत वह कार्य आते हैं ।जो कानूनी तौर पर गलत होते हैं।
 जैसे धूम्रपान करना ,चोरी करना ,लड़ाई झगड़ा करना दुसरो को सताना ,यौन संबंधों का दुपयोग करना या दुसरो पर आक्रामक रवैया करना आदि।

 मित्रों हमने आपको इस पोस्ट में सृजनात्मक बालक ,पिछड़े बालक मंदबुद्धि बालक ,समस्यात्मक बालक आदि के  विषयों में बहुत ही सरल रूप से बताने की कोशिश की है। मित्रों हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह आर्टिकल बहुत ही पसंद आया होगा। उम्मीद करते हैं। आप हमेशा हमसे जुड़े रहेंगे। और हमें यूं ही पसंद करते रहेंगे दोस्तों कृपया हमारी इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए। धन्यवाद 

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