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उपलब्धि का मूल्यांकन एवं प्रश्नों का निर्माण|| ctet 2020 padagogy notes|| ctet मनोविज्ञान नोट्स

उपलब्धि का मूल्यांकन एवं प्रश्नों का निर्माण

उपलब्धि का मूल्यांकन:- उपलब्धि का मूल्यांकन विद्यालय आधारित मूल्यांकन का ही एक रूप होता है। इसमें मूल्यांकन के द्वारा यह पता लगाया जाता है। कि बच्चे के उपलब्धि स्तर में कितना परिवर्तन हुआ है।

रचनात्मक मूल्यांकन    :- ब्लैक और विलियम के अनुसार रचनात्मक मूल्यांकन प्राय: इससे अधिक कुछ नहीं होता है कि मूल्यांकन बारंबार किया जाता है  और अध्यापन की तरह उसी समय दिया जाता है।

.रचनात्मक मूल्यांकनके मुख्य कार्य

 १.छात्रों को फीडबैक उपलब्ध कराना होता है।

२. प्रक्रिया एक:- सबसे पहले शिक्षक एक क्षेत्र का निर्माण करता है जो उसने पढाया है।

३.प्रक्रिया दो:- शिक्षक मूल्यांकन करता है ।और  ग्रेड निर्धारित करता है।

४. इसके बाद शिक्षक ,बच्चों के साथ फीडबैक देकर चर्चा करता है।

५.इसके बाद शिक्षक, त्रुटियों की जांच करता है।और उन्हें पूरा करने की योजना बनाता है।

नोट:-रचनात्मक मूल्यांकन, निदानात्मक मूल्यांकन के बहुत ही समीप है. अर्थात रचनात्मक मूल्यांकन और निदानात्मक मूल्यांकन की प्रक्रिया भी एक जैसी होती है। कुछ भी कंडीशन में अलग होती है।
प्रश्नों का निर्माण:-

प्रश्नों का निर्माण करना शिक्षक के लिए एक परीक्षण है।तथा उपयुक्त प्रश्नों का निर्माण करना शिक्षक की एक कला है। प्रश्नों का निर्माण करते समय,एक अच्छा शिक्षक बालक की स्थिति और पाठ्यक्रम को देखकर ही प्रश्न पत्र का निर्माण करता है। तथा एक अच्छा शिक्षक एक प्रश्नपत्र में सभी प्रकार के प्रश्नों को रखता है। ताकि इन प्रश्नों को सभी प्रकार के बच्चे सॉल्व कर सके हैं। प्रश्न निर्माण प्रक्रिया के दौरान सभी प्रकार के बच्चों का ख्याल रखा जाता है। ताकि मंदबुद्धि या तेज बुद्धि वाले बच्चे दोनों ही प्रश्नपत्र को सॉल्व कर सकें।

अच्छे प्रसन्न की विशेषताएं लिखिए:-

१.प्रश्न किसी उद्देश्य पर आधारित ही होने चाहिए,अर्थात जब भी हम किसी प्रश्न को बालक से पूछते हैं। तो उस प्रश्न का कुछ ना कुछ उद्देश्य जरूर होना चाहिए। ताकि उस प्रश्न से बच्चे को कुछ सीखने को जरूर मिले।

२.प्रश्न का निर्माण करते समय प्रश्नों में वस्तुनिष्ठता एवं व्यापकता दोनों प्रकार का होना अति आवश्यक होता है।

३. प्रश्न हमेशा विश्वसनीय होने चाहिए।

४.प्रश्न इस प्रकार दिए जाएं ताकि बच्चा प्रश्नों को अच्छे से समझ सके अर्थात पूछे गए प्रश्न की भाषा स्पष्ट एवं सरल होनी चाहिए।

५. पूछे गए प्रश्न का संबंध बच्चे के स्तर के अनुकूल ही होना चाहिए ।ताकि उस प्रश्न को बच्चा आसानी से समझ सके और उसको सॉल्व कर सके। अर्थात प्रश्न बच्चे के स्तर के ही होने चाहिए।

७. प्रशन की प्रकृति लचीली होनी चाहिए। जिससे कि बालकों को प्रश्नों को समझने एवं उत्तर देने में आसानी हो।

८. प्रश्न का स्वरूप कक्षा स्तर के अनुरूप ही होना चाहिए ताकि बालक कक्षा के अनुरूप ही उस प्रश्न का उत्तर दे सकें।


प्रश्नों के प्रकार //ctet 2020 padagogy notes|| ctet मनोविज्ञान नोट्स 

निबंधात्मक प्रश्न:-ऐसे प्रश्न मुख्य रूप से बड़ी कक्षाओं के लिए अधिक उपयोगी होते हैं। निबंधात्मक प्रश्नों का उत्तर काफी बड़ा होता है ।इसलिए इसका प्रयोग छोटी कक्षाओं के लिए नहीं किया जा सकता। इन प्रश्नों का उपयोग बड़ी कक्षाओं में किया जाता है।

२.लघु उत्तरीय प्रश्न:- यह प्रश्न कुछ हद तक प्राथमिक स्तर पर पूछे जाते हैं ।इनमें वस्तुनिष्ठता एवं विश्वसनीयता पाई जाती है।, ऐसे प्रश्नों का प्रयोग छोटी कक्षाओं में वार्षिक परीक्षाओं में किया जाता है।

३. अति लघु उत्तरीय प्रश्न:-ऐसे प्रश्नों का प्रयोग प्राथमिक स्तर पर सर्वाधिक किया जाता है।इन प्रश्नों का उत्तर एक या दो लाइन में होता है। बड़ी बड़ी कक्षाओं में भी इन प्रश्नों का प्रयोग भी किया जाता है।

४. चित्रात्मक प्रश्न:-यह प्रश्न छोटी छोटी कक्षा के बच्चों के लिए बहुत ज्यादा उपयोगी होते हैं, जैसे छोटे-छोटे बच्चे कुछ चित्रों पर रंग-बिरंगे कर लो का प्रयोग करके उनसे लिखना सीखते हैं, और आर्ट में बच्चे रंग भी भरते हैं। यह सब प्रश्न चित्रात्मक होते हैं।

५. रिक्त स्थान वाले प्रश्न,इन प्रश्नों का भी प्रयोग छोटी क्लास में ज्यादा किया जाता है। इस प्रकार के प्रश्नों में एक लाइन में कुछ जगह छोड़ दी जाती है। उस जगह में बच्चों को सही आंसर लिखना होता है.

६ मिलान करने वाले प्रश्न:-इस तरह के प्रश्नों का प्रयोग भी अधिकतर छोटी कक्षाओं में ही किया जाता है जिसमें एक जगह से दूसरी तरफ को मिलान किया जाता है। अर्थात गलत ऑप्शन को सही ऑप्शन से मिलाया जाता है।


७ बहुविकल्पीय प्रश्न:-इस तरह के प्रश्नों का प्रयोग बड़ी कक्षाओं में किया जाता है ।इस तरह के प्रश्नों का प्रयोग कंपटीशन एग्जाम में किया जाता है। इस तरह के प्रश्नों में चार या पांच विकल्प दिए गए होते हैं। जिसमें से विद्यार्थी को एक सही विकल्प का चयन करना होता है। चुना हुआ ऑप्शन है। उत्तर होता है।

दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आपको उपलब्धि का मूल्यांकन एवं प्रश्नों का निर्माण तथा रचनात्मक मूल्यांकन और प्रश्न निर्माण की प्रक्रिया को विस्तृत रूप से बढ़ाने का प्रयास किया है।

 हमने इसके अलावा आप लोगों को एक अच्छे प्रशन की विशेषता क्या-क्या होती हैं ।और प्रश्नों के निम्न प्रकार आपके समक्ष प्रस्तुत किए हैं, जैसे निबंधात्मक प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न ,अति लघु प्रश्न, लघुआत्मनक प्रश्न, रिक्त स्थान वाले प्रश्न, मिलान करने वाले, प्रश्न बहुविकल्पीय, प्रश्न आदि ।को स्पष्ट शब्दों में आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया है। उम्मीद है ।की आप सभी को हमारे द्वारा बताया गये, अच्छे से समझ में आ गए होंगे ।
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