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चिंतन किसे कहते हैं || अभिसारी चिंतन || अपसारी या सृजनात्मक चिंतन || सीखना किसे कहते है-ctet notes 2020 /सीटेट 2020 नोट्स


चिंतन  क्या है।what is thinking-ctet notes 2020|| सीटेट 2020 नोट्स 
 कागन तथा हेमेंन के अनुसार प्रतिमाओं ,प्रतिको संप्रत्यय, नियमों एवं अन्य मध्यस्थ इकाइयों के मानसिक जोड़-तोड़ को चिंतन कहा जाता है।
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  चिंतन के कितने प्रकार का होता है

 चिंतन को मुख्य रूप से तीन प्रकार के भागों में बांटा जाता है।



1. अभिसारी चिंतन क्या है :- इस तरह के चिंतन को निगमन आत्मक चिंतन भी कहते हैं । अभिसारी चिंतन में व्यक्ति दिए गए तथ्यों के आधार पर कोई सही निष्कर्ष तक पहुंच जाता है ।

जैसे 5 और 2 की गुणा करने पर क्या-क्या आएगा यह सोचना अभिसारी चिंतन का ही एक उदाहरण है। अर्थात साधारण भाषा में कहें तो इसमें व्यक्ति किसी ना किसी निष्कर्ष पर अवश्य  पहुंच जाता है।



2. अपसारी या सृजनात्मक चिंतन क्या है :- इस तरह के चिंतन  के चिंतन को  आगमन आत्मक चिंतन भी कहा जाता है।क्योंकि इस तरह के चिंतन में कोई व्यक्ति दिए गए तथ्यों में अपनी ओर से कुछ नया ज्ञान जोड़कर एक निष्कर्ष तक अवश्य पहुंच जाता है।

इस प्रकार का चिंतन सृजनात्मक बालकों में पाया जाता है। साधारण भाषा में समझे तो सृजनात्मकता वाले बच्चो में  अपसारी चिंतन पाया जाता है।

अपसारी चिंतन वह होता है। जिसमें कोई बच्चा या कोई व्यक्ति किसी भी कार्य को किसी अलग ढंग से करें या उसमें कुछ नया जोड़कर उसको कुछ अलग बनाएं इसी यह कार्य को हम सृजनात्मकता से जोड़ देते है।



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3 .आलोचनात्मक चिंतन क्या है।

  इस तरह के चिंतन में  कोई व्यक्ति किसी वस्तु घटना या तथ्य की सच्चाई को स्वीकार करने से पहले उसके गुण दोष की अच्छे से पढ़ा कर लेता है। तभी वह किसी प्रकार की आलोचना को अंजाम दे सकता है। यह आलोचना करना ही आलोचनात्मक चिंतन कहलाती है।

नोट:- परीक्षा की दृष्टि से  देखा जाए  तो हर वर्ष किसी ना किसी रूप में अभिसारी चिंतन और अपसारी चिंतन सीटेट /टेट की परीक्षा में पूछा ही पूछा जाता है।अर्थात इस बिंदु को अच्छे से अपनी नोटबुक में नोट कर लें और लिख ले, यह सत प्रतिशत आगामी परीक्षाओं में किसी ना किसी रूप में अवश्य पूछा जाएगा।

चिंतन के विकास के लिए शिक्षक को क्या क्या आवश्यक कार्य करने चाहिए-


 शिक्षक को बच्चे के  अंदर चिंतन के विकास के लिए निम्न कार्य करने चाहिए:-

👍 बच्चे को चिंतन के लिए हमेशा किसी ना किसी रूप में शिक्षक को प्रोत्साहित करते रहना चाहिए जिससे वह हमेशा चिंतन को करने के लिए अग्रणी रहे।

👍 चिंतन के लिए अधिक से अधिक अवसर प्रदान करने चाहिए इन अफसरों के माध्यम से ही बच्चों के अंदर चिंतन का विकास अच्छे से किया जा सकता है।

👍 बच्चों से गहन सोच वाले प्रश्नोत्तर करें। जिससे कि बच्चे का दिमाग कुछ चिंतन करें। और वह चिंतन की प्रक्रिया में परिपूर्ण हो सके।


👍 कक्षा में बच्चों से किसी भी एक विषय पर चर्चा में परिचर्चा अवश्य करनी चाहिए। और बच्चे से उस चर्चा में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। और एक नियम बनाना चाहिए। कि इस चर्चा में सभी बच्चे भाग लेंगे। और जो अच्छा करेगा ।उसको पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। ऐसा करने से बच्चे किसी भी चर्चा में खुशी-खुशी भाग लेंगे। और पुरस्कार प्राप्ति के लिए एक दूसरे से बढ़कर हिस्सेदारी प्रस्तुत करेंगे।

 सीखना किसे कहते है।  what is learning

सामान्य अर्थ में सीखना व्यवहार में परिवर्तन को कहा जाता है। परंतु सभी तरह के व्यवहार में हुए परिवर्तन को सीखना नहीं कह सकते । क्योंकि वह शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी हो सकता है।

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जैसे कि भूख ,दवा ,थकान आदि से हुए परिवर्तन को सीखना नहीं कहते ,क्योंकि मनोविज्ञान में सीखने से तात्पर्य , सिर्फ उन्ही स्थाई परिवर्तनों से है। जिन्हें अभ्यास या अनुभूति के फल स्वरुप सीखा गया हो या उन की प्राप्ति हुई हो।


शिक्षण अधिगम की मूल प्रक्रिया क्या क्या है।ctet notes 2020|| सीटेट 2020 नोट्स 

 शिक्षण अधिगम प्रक्रिया उस प्रक्रिया को कहते हैं। जिसमें शिक्षक वह बच्चे को किसी उद्देश्य के लिए विभिन्न शिक्षण विधियों द्वारा कोई संप्रत्यय सिखाया गया हो।
इसके मुख्य तीन रूप से तीन बिंदु या फिर क्रियाएं होती है।

1 उद्देश्य

2 अधिगम अनुभव क्रियाएं

3 विद्यार्थी का मूल्य निर्धारण या मूल्यांकन


 शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है इसलिए इसे प्रभावी बनाने के लिए शिक्षक में निम्न योग्यताएं होनी अनिवार्य है।



 👍शिक्षक को शिक्षा के लक्ष्य और उसके उद्देश्य के बारे में पता होना चाहिए। 

👍 बाल मनोविज्ञान का ज्ञान का होना अनिवार्य है। अतः वह बालक के लक्षणों  को बाल मनोविज्ञान के द्वारा ही समझ सकता है। की बालक को क्या और कैसे पढ़ाना है।

👍 शिक्षक को शिक्षा के लक्ष्य और उसके उद्देश्य के बारे में संपूर्ण जानकारी पहले से ही होनी चाहिए ताकि वह इन नियमों का पालन बच्चों को शिक्षा प्रदान करते समय काम में आए।

👍  शिक्षक बच्चों को पाठ्यवस्तु को पढ़ाने के लिए वह विभिन्न युक्तियों के साधनों को अच्छे से प्रयोग करना जानता हो, ताकि वह बच्चों को अच्छे ढंग से और बच्चे की आवश्यकता अनुसार उन साधनों का प्रयोग कर सकें जिससे कि बच्चों की समाज विकसित हो सके। एक अच्छा अध्यापक बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार की पाठ्यवस्तु के साथ-साथ पढ़ाने की साधनों का भी अलग-अलग ढंग से पढ़ाने का प्रयास करता है जिससे कि बच्चों की रुचि कक्षा में निरंतर बनी रहे ।और वह अपने विषयों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

👍 एक शिक्षक तभी कक्षा में पूरी तरह से बच्चों को पढ़ाने में समर्थ हो सकता है जब तक कि वह बच्चों की कमियों को पता लगाकर उन कमियों को दूर करने का प्रयत्न ना करें।  अर्थात एक शिक्षक को बच्चे की कमियों और उसकी कमजोरियों का पता लगाकर बच्चे की सभी प्रकार की कमजोरी को दूर करने का प्रयास करना चाहिए ताकि बच्चा अपने मार्ग में आने वाली अनेक कठिनाइयों को दूर करके आगे बढ़ सके।

👍 एक अच्छे शिक्षक के लिए बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक विधियों का भी ज्ञान होना अति आवश्यक है क्योंकि बच्चे विभिन्न प्रकार की श्रेणियों में आते हैं अतः उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक को बच्चों के हिसाब से या बच्चे की सोच के अनुसार ही उस विधि का चयन करें जिससे कि बच्चा अच्छे से समझ सके।

👍 एक अच्छे शिक्षक को कक्षा में आने से पूर्व भी इस बात का पहले से ही पता होना चाहिए।  कि आज कक्षा में क्या पढ़ाना है। अर्थात उसे जो कक्षा में पढ़ाना है। वह उसे एक बार घर अच्छे से पढ़कर के करके आएगा ।तब जाकर बच्चों को पढ़ाएंगा तो उसका एक अच्छा ही इफेक्ट पढ़ाई में देखने को मिल सकता है।


मित्रों हमने अपने इस आर्टिकल में आज आपको ,अभिसारी चिंतन, अपसारी चिंतन आलोचनात्मक चिंतन और सीखना तथा शिक्षण अधिगम की मूल प्रक्रियाओं के बारे में बहुत ही साधारण शब्दों में आप लोगों के समक्ष अपनी बात को रखा है। 

अतः आप लोगों को यदि हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो कृपया हमारी इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें और हमें फेसबुक पर की फॉलो करें।
धन्यवाद

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