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समाजीकरण की प्रक्रिया || सामाजिकरण क्या होता है|| समाजीकरण की विशेषताएं लिखि।सीटेट / यूपी टेट नोट्स ctet /tet notes 2020

 समाजीकरण की प्रक्रिया || सामाजिकरण क्या होता है|| समाजीकरण की विशेषताएं लिखिए-सीटेट / यूपी टेट नोट्स ctet /tet  notes 2020 

समाजीकरण का अर्थ
सामाजिकरण एक ऐसी प्रक्रिया होती है।व्यक्ति को एक सामाजिक प्राणी बनाती है। इसके अभाव में व्यक्ति एक पशु के समान है।सामाजिकरण के द्वारा व्यक्ति सामाजिक मापदंडों को जानता है ,सीखता है और उसके साथ समायोजन या अनुकूलन करता है।

सीटेट / यूपी टेट नोट्स ctet /tet  notes 2020 
सामाजिकरण के द्वारा ही बच्चों में आमूलचूल परिवर्तन आते हैं। सामाजिक प्रक्रिया के दौरान बच्चा अच्छी और बुरी आदतें सीखता है। बच्चा जैसे समाज में रहता है। वह वैसा ही बन जाता है। अगर बच्चे में बुरी आदतों  का समावेश हो जाता है।तो वह बहुत ही गलत होता है। और अच्छी बात का समायोजन हो जाता है ।तो यह बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए अति महत्वपूर्ण होता है।

 सामाजिक मापदंड क्या होता है|| मनोविज्ञान में सामाजिक मापदंड की भूमिका क्या होती है

सामाजिक मापदंड के विषय में अवगत कराने के लिए आपके लिए परीक्षा की दृष्टि से कुछ आवश्यक बिंदु हैं। जिन्हें आप अपनी नोटबुक में नोट कर सकते हैं ।यह बिंदु सीटेट की गत वर्ष की परीक्षा में पूछे जा चुके हैं।

 1 .समाज में सही और गलत की पहचान करना ही सामाजिक मापदंड है।

2. यह जानना कि कौन से कार्य सामाजिक रूप से उपयुक्त होते ।हैं और कौन से कार्य सामाजिक दृष्टिकोण से उपयुक्त नहीं है यह भी सामाजिक मापदंड के अंतर्गत आता है।

3. दूसरों के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना है यह भी सामाजिक मापदंड के अनुकूल ही आता है।

4. अपने से बड़े एवं छोटे का आदर करना और अपनी वाणी में प्रेम पूर्वक व्यवहार लाना माता-पिता का सम्मान करना आदि भी सामाजिक मापदंड ही है।

5. किसी व्यक्ति को किसी प्रकार से नुकसान ना पहुंचा ना और किसी व्यक्ति को आपदा या परेशानी के समय उसकी मदद करना उसके लिए तत्पर रहना ही सामाजिक मापदंड के अंतर्गत आता है अर्थात हमें दूसरों की सहायता करना सिखाता है।

6. हमेशा अपने वातावण का संरक्षण करना और वातावरण के प्रति जागरूक रहना

7. सामाजिक रूप से संबंध स्थापित करना और दूसरों को भी सामाजिकता से जोड़ना। आदि

ऊपर बताए गए 7 बिंदु परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है अतः इन्हें अपनी नोटबुक में नोट कर लें


बालक के सामाजिक विकास में सहायक कारक || समाजीकरण को प्रभावित करने वाले कारक
 बालक के  सामाजिक विकास में निम्न कारक अति आवश्यक होते हैं।


1.परिवार
2.माता-पिता
3.दोस्त/साथी
4.पड़ोस
5.समाज
6.स्कूल
7.शिक्षक
8.समुदाय
9.मनोरंनात्मक उपकरणों का प्रभाव 
10.धर्म और संस्कृति
1.परिवार/समाजीकरण में परिवार की भूमिका:-बच्चे के सामाजिक विकास में परिवार सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। परिवार के द्वारा ही बच्चा छोटी-छोटी हर जरूरत की चीज को अपने जीवन में उतारता है। और उसे भविष्य में अपने ऊपर अप्लाई करता है। इसलिए बच्चे को एक अच्छा परिवेश देना बहुत ही आवश्यक होता है। बच्चे में समाजीकरण की प्रक्रिया के दौरान बच्चे में अच्छे गुणों का विकास बहुत ही आवश्यक होता है।
 इसमें परिवार का रोल बहुत ही आवश्यक होता है। बच्चा जैसा घर में सीखता है । वह वैसा ही व्यवहार घर से बाहर करता है इसलिए बच्चे के अच्छे सामाजिक विकास के लिए परिवार को अपने ऊपर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। और बच्चे के लिए अच्छा वातावरण का माहौल अपने परिवार में रखना चाहिए। जिससे कि बच्चे के अंदर अच्छी भावनाएं  और अच्छे विचार आये जिससे बच्चा आगे अच्छे से कार्य करें।

2.माता-पिता/समाजीकरण की विशेषताएं लिखिए:- बच्चे के सामाजिक विकास में मां बाप का व्यवहार बहुत ही आवश्यक होता।है बच्चे के मां-बाप जैसा उस बच्चे के अंदर विकास डालेंगे बच्चा जैसा ही घर से बाहर सीखेगा । अतः बच्चे के सामाजिक विकास पर उसके माता-पिता का बहुत ही अहम रोल होता है। मां बाप को बच्चे के अंदर अच्छे अच्छे गुणों का विकास करना चाहिए और अच्छी वाणी बोलने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। ताकि वह किसी दूसरे व्यक्ति से अच्छे ढंग से व्यवहार करें।

3.दोस्त/साथी- बालक के विकास में उसके दोस्त और मित्रों का की बहुत ही अहम योगदान होता है। वह जैसी संगत में रहता है, वैसा ही सीखता है। अतः उसके साथियों की संगत का असर उसकी जीवन शैली पर पड़ सकता है।

4.पड़ोस:- बालक की सामाजिक विकाश की  प्रक्रिया के दौरान उसके पड़ोस का भी अहम रोल होता है ।बच्चा अपने पड़ोस में जैसा सीखता है ।वह अपने अंदर वैसी ही बातों को डाल देता है।
5.समाज:- यहां समाज से तात्पर्य ऐसी माहौल से होता है ।जहां पर वह रह रहा है।वह जैसे समाज में रहेगा वह वैसा ही व्यवहार करेगा।
6.स्कूल/समाजीकरण में विद्यालय की भूमिका:- बच्चे के सामाजिक विकास है। विद्यालय का वातावरण बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।क्योंकि यहां पर बालक अपने अंदर बहुत सारी भावनाओं को और कई तरह के विषयों, खेलो आदि के विषय में परिचित होता है।
 और वह विद्यालय से ही एक अच्छे वातावरण का माहौल बनाना सीखता है ।और उस माहौल को ही अपने घर  परिवार पर दिखाने का प्रयास करता है। अतः बच्चे के सामाजिक विकास में विद्यालय का भी अहम योगदान होता है।
7.शिक्षक:- बालक के सामाजिक विकास के अंतर्गत उसके शिक्षक का व्यवहार भी बहुत ही आवश्यक होता है । यूं कहें कि शिक्षक की एक अच्छे बालक का निर्माता होता है। शिक्षक के द्वारा बताए गए। नियमों कायदों को बच्चे अच्छे से सीखते हैं। और एक अच्छे शिक्षक की भांति शिक्षक बालक की हर एक परेशानी को उससे पूछ कर । उसे हल करने का प्रयास करता है। जिससे कि बालक अपने अंदर की सभी प्रकार की समस्याओं को शिक्षक को आसानी से पता कर उनको ठीक करने का प्रयास करता है । इसलिए एक बालक के समाजीकरण में शिक्षक का सर्वाधिक योगदान होता है। बालक के सामाजिकरण में जिस प्रकार उसके मां-बाप परिवार दोस्त साथी आदि का रोल बहुत महत्वपूर्ण होता है। उसी प्रकार एक शिक्षक का भी अहम योगदान होता है।

8.समुदाय:- च्चे के सामाजिकरण में उसका समुदाय भी एक रोल निभाता है। समुदाय का असर भी बच्चे की जीवन शैली पर पड़ता है।

9.मनोरंनात्मक उपकरणों का प्रभाव :- बच्चे के विकास में मनोरंजनात्मक उपकरणों का भी प्रभाव आजकल बहुत तेजी से पड़ रहा है ।
जैसे टेलीविजन ,मोबाइल ,लैपटॉप आदि का प्रभाव बच्चे की जीवन शैली पर अधिक पड़ता है। क्योंकि आजकल का जमाना बहुत ज्यादा टेक्निकल होता चला जा रहा है। और ज्यादातर युवा पीढ़ी मोबाइल पर अधिक फोकस कर रही है। और सभी प्रकार की शिक्षाएं ऑनलाइन ही संचालित की जा रही हैं। इसलिए टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए बालक ओर  बालिकाओं पर भी इन उपकरणों का प्रभाव पड़ता है।  वह प्रभाव अच्छे या गलत दोनों प्रकार के हो सकते हैं। क्योंकि आजकल इंटरनेट पर तमाम प्रकार के डाटा उपलब्ध होते हैं। मूवी ,फोटोस ,अध्ययन सामग्री खबरें , आदि को देखकर बालकों में रुचि ओर अरुचि दोनों प्रकार की भावनाओं का विकास हो सकता है। और बालक के अंदर अच्छे और बुरे गुणों का विकास भी हो सकता है 
क्योंकि वर्तमान में हम आजकल रोज नई नई  खबरें देखते हैं । कि 18 साल के युवा ने रेप, बलात्कार और मर्डर जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है । उन पर यही टेक्नोलॉजी , परिवेश , समाज का और  साथी मित्रों का भी व्यवहार उन पर पड़ता है। क्योंकि व्यक्ति जैसा इन सब से सीखेगा वैसा ही बर्ताव वह निजी जीवन में करेगा इसलिए और मित्र कम ही बनाएं पर अच्छे बनाएं
इसलिए मित्र बनाते समय अच्छे मित्रों का ही चुनाव करें । एक अच्छे मित्र से ही हम अपने जीवन को अच्छे रास्ते पर ले जा सकते हैं।
10.धर्म और संस्कृति/समाजीकरण में धर्म की भूमिका/

लिंग समाजीकरण क्या है?

:- बालक के सामाजिक विकास के दौरान धर्म और संस्कृति का प्रभाव भी पड़ सकता है।

सीटेट / यूपी टेट नोट्स ctet /tet  notes 2020
सीटेट / यूपी टेट नोट्स ctet /tet  notes 2020 


मित्रों आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी अगर अच्छी लगी है तो कृपया अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कीजिए दोस्तों नीचे अब हम आपको कुछ महत्वपूर्ण बिंदु लब्ध कराएंगे जो आगामी सीटेट, tat ओर  सुपर टेट तथा अन्य प्रकार की परीक्षाओं के लिए बहुत ही आवश्यक होंगे।

1... समाजीकरण की प्रक्रिया जन्म से ही आरंभ हो जाती है।

2... शैशवावस्था में सामाजिक विकास मुख्यतः अनुकूल पर आधारित होता है।

3. सामाजिकरण प्रक्रिया में मां-बाप तथा परिवार की भूमिका प्राथमिक होती है।

4. सबसे अधिक कैन एवं जटिल सामाजिकरण किशोरावस्था में होता है।

ऊपर दिए गए चारों पॉइंट सीटेट की परीक्षा में पूछे जा चुके हैं। अतः इन्हें एक नोटबुक में आप नोट डाउन कर सकते हैं। मित्रों हमारी पोस्ट आपको जरूर अच्छी लगी होगी कृपया इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कीजिए बहुत-बहुत धन्यवाद आभार

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