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व्यक्तित्व भिन्नता क्या होती है || व्यक्तिगत विभिन्नता से आप क्या समझते हैं-सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विधियां/मूल्यांकन के सोपान ctet /tet notes 2020

व्यक्तित्व भिन्नता क्या होती है|| व्यक्तित्व का अर्थ एवं परिभाषा- ctet /tet notes 2020 

किन्हीं दो व्यक्तियों की आदत शीलगुण ,बुद्धि एवं अन्य व्यवहारों में जो अंतर होता है। उसे हम व्यक्तिक भिन्नता कहते हैं ।इस प्रकार व्यक्तिक भिन्नता शारीरिक एवं मानसिक गुणों में हो सकती है।

 परिभाषा -
 जेम्स ड्रेवर के अनुसार- कोई व्यक्ति अपने समूह के शारीरिक तथा मानसिक गुणों के औसत से अधिक जितना  भिन्न  रहता है । उसे व्यक्तित्व भिन्नता कहते हैं।

व्यक्तित्व भिन्नता के क्षेत्र ओर प्रकार- ctet /tet notes 2020 


1. शारीरिक लक्षण:- प्रत्येक व्यक्ति शारीरिक रूप से भिन्न होता है ।
जैसे कोई साबला ,कोई गोरा ,कोई लंबा या कोई छोटा किसी की आंखें भूरी, तो किसी की नीली होती हैं। यहां तक कि जुड़वा बच्चों में भी कुछ व्यक्तित्व भिन्नता पाई जाती हैं। इन्हीं लक्षणों को हम शारीरिक  भिन्नता के लक्षण भी कहते है।

2.बुद्धि:- कुछ व्यक्ति ,निम्न बुद्धि के कुछ औसत तथा कुछ उच्च बुद्धि के होते हैं। तीव्र बुद्धि वाले बच्चे पढ़ने में होशियार होते हैं। और वह अपने कार्य को सहजता पूर्वक कर लेते हैं।और निम्न कोटि के बच्चे पढ़ने में निम्न कोटि के होते हैं। और वह किसी कार्य को आसानी से नहीं करते है।


3.रुचि:- प्रत्येक व्यक्ति की रूचि भिन्न-भिन्न होती है।
 जैसे :-किसी बच्चे को गणित पसंद है तो किसी को इंग्लिश, तथा किसी बच्चे को क्रिकेट पसंद है ।किसी बच्चे को फुटबॉल , सभी प्रकार के बच्चों में उसकी अलग-अलग विषय के अंतर्गत रुचि होती है ।वह जिस भी विषय में रुचि लेता है। उस विषय को बहुत ही रोचक ढंग से सीखता है।


4.संवेग:- संवेगात्मक अभी व्यक्तियों में व्यक्तिक भिन्नता पाई जाती है कुछ लोगों में संवेगात्मक व्यक्ति कम होती है तथा कुछ में ज्यादा होती है।
संवेग के द्वारा ही बच्चा अधिक गुस्से बाला हो सकता है। और अधिक प्रेम पूर्ण व्यवहार भी कर सकता है। 
जैसे गुस्सा प्रेम स्नेह आदि


5.सामाजिक गुण:- प्रत्येक बच्चे के अलग अलग सामाजिक गुण हो सकते हैं ।सामाजिक गुणों से तात्पर्य वह अपनी आदत और जिस समाज में रहता है। उसको हर अलग-अलग ढंग से कार्य करने की श्रेणी में रखा जा सकता है।


6.भाषा:- भाषा के विकास में भी व्यक्तिगत भिन्नता देखने को मिलती हैं ।यदि कोई व्यक्ति इंग्लैंड में पैदा हुआ है ।तो वह अंग्रेजी बोलेगा। यदि कोई व्यक्ति हिंदुस्तान में पैदा हुआ है। तो वह हिंदी बोलेगा अर्थात यदि कोई व्यक्ति हिंदुस्तान में तो पैदा हुआ है। लेकिन वह हिंदुस्तान के किसी दूसरे राज्य में रहता है  तो उस पर राज्य की बोली का भी असर देखने को मिल सकता है। जैसे तमिल, तेलुगू, हिंदी आदि।


 7.सीखने का तरीका और कार्य करने की क्षमता:- प्रत्येक बच्चे की सीखने का तरीका भिन्न-भिन्न होता है जैसे कोई बच्चा सुनकर जल्द सीखता है तो कोई करके सीखता है ठीक उसी प्रकार बच्ची की कार्य करने की क्षमता भी विकसित हो सकती है।
8.व्यक्तित्व:- व्यक्त्त में भी व्यक्तित्व भिन्नता देखने को मिलती है।


व्यक्तित्व भिन्नता के कारण
1.आनुवांशिक
2.वातावरण
3.प्रजाति एवं  राष्ट्रयता
4.परिपक्वन
5.लिंग
6.आर्थिक सामाजिक स्थिति
7.शिक्षा
8.संस्कृति
आदि

 अधिगम का मूल्यांकन- ctet /tet notes 2020 

मूल्यांकन मूल्यांकन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का एक सोपान है। उसमें शिक्षक यह सुनिश्चित करता है। कि उसके द्वारा की नई शिक्षण व्यवस्था तथा शिक्षण को आगे बढ़ाने की क्रिया कितनी सफल हो रही है।

अधिगम का मूल्यांकन
 यह मूल्यांकन शिक्षा प्राप्ति के बाद किया जाता है।अर्थात जब शिक्षक बच्चों को सिखा देता है। तब वह मूल्यांकन के द्वारा यह जानता है। कि शिक्षार्थियों ने कितना ओर किस प्रकार सीखा है।

 अधिगम के लिए मूल्यांकन
इसमें शिक्षक बच्चों को सिखाने के लिए बच्चों के उस टॉपिक अवधारणा के प्रति विज्ञान का मूल्यांकन करता है।
 जैसे शिक्षक कक्षा के कार्य को एकत्र करता है ।उन्हें पड़ता है उसके बाद बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए योजना बनाता है।


अधिगम के रूप में मूल्यांकन:- इसमें शिक्षक बच्चों से अधिगम के रूप में कोई क्रिया कलाप करवाएगा। यह क्रियाकलाप एक प्रकार से अधिगम है। परंतु शिक्षक उस क्रिया इलाकों के द्वारा बच्चों का मूल्यांकन भी कर लेता है।

विद्यालय आधारित मूल्यांकन:- इसमें शिक्षक को विद्यालय के मापदंडों को ध्यान में रखकर मूल्यांकन करना होता है।
 जैसे बच्चों के अंक निर्धारित करने होते हैं। औपचारिक प्रक्रिया अपनानी होती हैं।

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन:- सतत का अर्थ है निरंतर एवं लगातार और व्यापक का अर्थ है। सर्वांगीण एवं विस्तृत अर्थात बच्चों का निरंतर एवं सर्वांगीण विकास सभी क्षेत्र का मूल्यांकन ही सतत एवं व्यापक मूल्यांकन कहलाता है।



सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएं
 सतत मूल्यांकन  इसलिए आवश्यक है ,,ताकि वह बच्चा कितना सीख रहा है ,उसकी त्रुटियां क्या है, शिक्षक की शिक्षा पद्धति कितनी कारगर साबित हो रही है, आदि के बारे में बताने के बारे और उसमें सुधार किया जा सके।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में बच्चे की बुद्धि ,रुचि शिक्षा का स्तर, सीखने का तरीका ,कार्य करने की क्षमता , सामाजिक विकास ,संज्ञानात्मक विकास ,कार्य क्षमता ,आर्थिक सामाजिक स्तर पृष्ठभूमि  आदि के बारे में सबकुछ जानकारी किया ली जाती है।

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विधियां/मूल्यांकन के सोपान- ctet /tet notes 2020 

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विधियां है और इन विधियों का प्रयोग करके बालक को शिक्षा प्रदान की जाती है जिससे कि बालक की रुचि और पढ़ने के स्तर को ध्यान में रखकर उसको शिक्षा प्रदान की जा सके।

निरीक्षण विधि ,प्रश्नावली विधि ,प्रश्नोत्तर विधि, साक्षात्कार विधि ,जांच सूची ,विवरण विधि आदि है।

प्राथमिक स्तर पर बच्चे की रिकॉर्ड को रखने का सबसे आसान है। संसाधन पोर्टफोलियो होता है ।हम इसके बारे में आपको दूसरे आर्टिकल  बताएंगे ,शॉर्टकट में बताये तो पोर्टफोलियो में बच्चे के रिकॉर्ड को रखा जाता है।इसमें बच्चे के सभी प्रकार के डाक्यूमेंट्स रखे होते है।



 दोस्तों हमने इस आर्टिकल में आप लोगो को मूल्यांकन के सभी प्रकारों को बहुत ही अच्छे ढंग से बताने का प्रयास किया है। लेकिन फिर भी कोई त्रुटि रह गई हो।तो हम क्षमा प्रार्थी हैं। मित्रों इस आर्टिकल में हमने आपको अधिगम के लिए मूल्यांकन अधिगम का मूल्यांकन अधिगम के रूप में मूल्यांकन और विद्यालय आधारित मूल्यांकन तथा सतत एवं व्यापक मूल्यांकन सतत एवं मूल्यांकन की विशेषताएं सतत मूल्यांकन हाथी के बारे में विस्तृत रूप से व्याख्या की गई है अभय इस आर्टिकल में है मिलते हैं दूसरे आप सभी का बहुत-बहुत आभार धन्यवाद उनसे जुड़ने के लिए हमारे पेज को लाइक कीजिए और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर कीजिए



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