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बाल केंद्रित शिक्षा किसे कहते हैं|| बाल केंद्रित शिक्षा का महत्व || बाल केन्द्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा ctet/tet 2020 notes

बाल केंद्रित शिक्षा क्या है || बाल केन्द्रित शिक्षा का अर्थ -ctet/tet  2020 notes  

बाल केंद्रित शिक्षा से तात्पर्य ऐसी शिक्षा प्रणाली से है।जिसमें बालक शिक्षा का केंद्र बिंदु होता है। इसमें बालक का स्थान प्राथमिक तथा शिक्षक स्थान दृतिय होता है।
बाल केंद्रित शिक्षा में बालक के सर्वांगीण विकास पर अधिक जोर दिया जाता है। 
बाल केंद्रित शिक्षा का महत्व
बाल केंद्रित शिक्षा किसे कहते हैं

इसके अनुसार शिक्षक को बालक को समझना अति आवश्यक है।अतः शिक्षक को बाल मनोविज्ञान का ज्ञान बहुत ही जरूरी होता है। वह तभी बच्चे को सही ढंग से समझ सकता है।बाल केंद्रित शिक्षा में शिक्षा मनोविज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस पद्धति वह प्रत्येक बालक पर अलग-अलग ध्यान दिया जाता है। हर एक  बालक की रुचि, क्षमता ,स्तर, सीखने का तरीका ,व्यवहार ,पृष्ठभूमि आदि का ज्ञान शिक्षक को होना चाहिए । पिछड़े,मंदबुद्धि वाले बालकों के लिए विशेष पाठ्यक्रम और  शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए। और प्रत्येक बच्चे को उसकी योग्यता के अनुसार शिक्षा देनी चाहिए।

प्रगतिशील शिक्षा क्या होती है।ctet/tet  2020 notes 


🌼प्रगतिशील शिक्षा में जॉन डीवी का विशेष योगदान रहा है। प्रगतिशील शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य बालक की शक्तियों का विकास करना है। इसमें व्यक्तिक भिन्नता को ध्यान में रखकर शिक्षा प्रदान की जाती है।

🌼 प्रगतिशील शिक्षा में प्रोजेक्ट विधि, समस्या समाधान विधि, करके सीखना विधि आदि का उचित प्रयोग किया जाता है।

प्रगतिशील शिक्षा के उद्देश्य

1.बच्चे को प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान की जाए ।

2.बच्चे को क्रियाकलाप करने की स्वतंत्रता दी जाए ।

3.सामूहिक क्रियाकलाप में सक्रिय सहभागिता का निर्वाह किया जाए। 

4.बच्चे को स्वयं ही सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में सक्षम बनाना। 

5.समय सारणी ,बैठने की व्यवस्था शिक्षण पद्धतियों का लचीलापन
6.बालक के मनोविज्ञान को समझना

 7.बालक के सर्वांगीण विकास पर बल देना।

8.बालक की शिक्षा एवं रुचि, मूल प्रवृत्तियों ,प्रेरणा ,संवेग आदि को ध्यान में रखकर शिक्षण प्रदान करना

9.शिक्षण विधि से अधिगम को व्यावहारिक बनाना



बुद्धि निर्माण एवं बहु आयामी बुद्धि

 बुद्धि क्या है।

 बुद्धि क्या है।
                                                बुद्धि क्या है।

 बैंसलर के अनुसार:- बुद्धि किसी व्यक्ति के द्वारा उद्देश्य पूर्ण ढंग से कार्य करने  ताकि चिंतन करने तथा वातावरण के साथ प्रभावपूर्ण ढंग से क्रिया करने की सामूहिक योग्यता है

वुडबर्थ के अनुसार:- बुद्धि कार्य करने की एक विधि होती है।

 थार्नडाइक के अनुसार:- सत्य या तथ्य की दृष्टिकोण से उत्तम प्रतिक्रियाओं की शक्ति ही बुद्धि कहलाती है।

बुद्धि के सिद्धांत कौन-कौन से हैं
 बुद्धि के निम्न सिद्धांत है।
 बुद्धि के सिद्धांत कौन-कौन से हैं।

बुद्धि के सिद्धांत कौन-कौन से हैं

 एक कारक सिद्धांत:- इस का प्रतिपादन विनय ने किया और इस सिद्धान्त का समर्थन कर, इसको आगे बढ़ाने का श्रेय टर्मन और स्टर्न जैसे मनोवैज्ञानिकों ने किया है। इन मनोवैज्ञानिकों का मत है।कि बुद्धि एक अविभाज्य इकाई है।

 दोकारक सिद्धांत:- बुद्धि के इस सिद्धांत के प्रतिपादक स्पियरमेंन है। स्पियरमेंनका मानना है , कि प्रत्येक व्यक्ति में दो प्रकार की बुद्धि होती है ।
 सामान्य बुद्धि ओर विशिष्ट बुद्धि

बुद्धि का बहुकारक का सिद्धांत:-
 बहुआयामी बुद्धि का समर्थन केली ओर थर्स्टन ने किया।
कैली के अनुसार बुद्धि का निर्माण का माप ,संकेत योग्यता ,यांत्रिक योग्यता ,सामाजिक योग्यता, संगीत योग्यता से होता है।आत्म योग्यता ,स्थानिक संबंध सूची सारी योग्यता आदि योग्यताओं से होता है।
thurstn के अनुसार बुद्धि का निर्माण तार्किक एवं वाचिक प्रत्यक्षीकरण योग्यता आदि से होता है।

 लैंगिक मुद्दे क्या है

स्त्री पुरुष लड़का लड़की में भेदभाव करना ही लैंगिक मुद्दे कहलाता है।
 स्त्री व पुरुष को समान अवसर ना मिलना,स्त्री को पुरुष के समान अधिकार ना देना, लड़कियों को शिक्षा के कम अवसर मिलना,यह सब लैंगिक मुद्दे का ही उदाहरण है।

लैंगिक मुद्दे के कारण
पूर्वाग्रह एवं रूढ़िबद्धता
सामाजिक प्रथाएं
संस्कृति
विचारो की सीमितता
आदि

वर्तमान समय में भारत सहित कई देशों में  बहुत सारी पुरानी सामाजिक प्रथा चली आ रही है  और यह वर्तमान के समय को खराब कर रही हैं। इससे समाज में बहुत ही गलत संदेश जाता है ।और इसमे अच्छे व गलत विचार सम्मिलित होते हैं। कुछ पुरानी धारणाओं से किसी की जिंदगी भी तहस नहस  सो जाती है।हम उदाहण के तौर पर मान लेते हैं। कि किसी की सूरत अच्छी नही  है। तो फिर तो फिर गलत प्रवृत्ति के लोग उस पर आरोप-प्रत्यारोप लगाएंगे। और पुरानी धारणा लगाएंगे।इसी सब कु-कथाएं हमारे समाज को गंदा कर रही है।


लैंगिक मुद्दे के उपाय:-


एक शिक्षक के रूप में आपके विचार क्या होनी चाहिए।

1. लड़के और लड़कियों को समानता की दृष्टि से देखना तथा लड़के और लड़कियों को समान रूप से शिक्षा प्रदान करना।

2. लड़के और लड़कियों को संरक्षण प्रदान करना और समान रूप से सभी क्रियाकलापों में सहभागिता निभाने को प्रोत्साहित करना।

3. कक्षा में लड़के व लड़कियों को समान अधिकार व सम्मान देना चाहिए।

4. कक्षा में लड़के व लड़कियों को समान अधिकार समान रूप से सम्मान के अलावा सभी को समान रूप से कक्षा के क्रियाकलापों में सम्मिलित करना चाहिए।

5. लड़कियों को लड़कों की भांति खेलकूद में समान रूप से भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

दोस्तों अभी हमने आपको बहुत ही सरल शब्दों में लैंगिक मुद्दों के विषय में अवगत कराया है दोस्तों को उम्मीद है कि आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया होगा मित्रों अगर आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया हो तो कृपया अपने दोस्तों अभी इसको शेयर कीजिए।

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