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मनोविज्ञान क्या है(what is Psychology in hinde)- CTET Study Materials | Download Study Notes CTET Study Material 2020:हिंदी सीटेट ctet notes 2020


 मनोविज्ञान क्या है(what is Psychology in hinde)


मनोविज्ञान शब्द की उत्पत्ति ,मनोविज्ञान को अंग्रेजी भाषा में साइकोलॉजी कहते हैं। मनोविज्ञान की उत्पत्ति लेटिन भाषा के साइकोलॉजिया (Psychologiya)शब्द से हुई है।
Psychologi  शव्द भी दो शव्दों से मिलकर बना है। Psychology शब्द की उत्पत्ति हुई है

  "" Psyche+logos=psychology"" 


child development and pedagogy study material in english pdf


psychology का अर्थ " आत्मा का अध्ययन" है।


 शिक्षा क्या है।

मनोविज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा

शिक्षा शव्द की उत्तपत्ति संस्कृत की शिक्ष धातु से हुई है।
इसका अर्थ है। "सीखना या सिखाना"
शिक्षा को अंग्रेजी भाषा में Education कहा जाता है।
"EDUCATION" शव्द भी लैटिन भाषा के "educatom" से बना है।


 दोस्तों  हमने अभी आपको साइकोलॉजी और साइकोलॉजी की उत्पत्ति आदि के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया है उम्मीद है आपको हमारी सरल शब्दों में स्पस्ट भाषा समझ मे गए होगी। दोस्तों अब आपको हम शिक्षा मनोविज्ञान के विषय में जानकारी देंगे आखिर शिक्षा मनोविज्ञान है क्या

शिक्षा मनोविज्ञान क्या है।

 मनोविज्ञान को शिक्षा से जोड़ने का कार्य "एल्बर्ड एल०थार्नडाइक"  ने किया था ।उन्होंने ही सर्वप्रथम शिक्षा मनोविज्ञान की "एजुकेशन साइकोलॉजी" नामक पुस्तक लिखी थी। और थार्नडाइक के शिक्षा मनोविज्ञान के व्यवहार का अध्ययन किया जा सकता है ।और शिक्षा के द्वारा उस में लाया जा सकता है ।
शिक्षा मनोविज्ञान हमें मनोविज्ञान से जुड़े अनेक रहस्यों के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करता है।
हम आपको बाल मनोविज्ञान के विषय से अवगत कराते हैं ,आखिर यह बालमनोविज्ञान है क्या..?


बाल मनोविज्ञान क्या है।

 बाल मनोविज्ञान  का शाब्दिक अर्थ है, बालमनोविज्ञान का विज्ञान  बच्चों के लिए बना है। विज्ञान बाल मनोविज्ञान में बालक के विकास के विभिन्न पक्षों का अध्ययन करता है। इसमें बच्चे के लिए विकास किस प्रकार करना है। कैसे करना है। यह अध्ययन ही बाल मनोविज्ञान कहलाता है ।
जीन प्याजे को बाल मनोविज्ञान का जनक कहा गया है।
 अब हम आपको विकास की अवधारणा और से जुड़े संबंधों को पूरी तरह से स्पष्ट करेंगे। आज के बाद आपको यह बार-बार पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कृपया नोट्स बनाते चले ,क्योंकि अपने नोट्स से ही अच्छे से पढ़ाई हो सकती है। चाहे आप यूट्यूब से पड़े या इंटरनेट के माध्यम से पढ़ें।  जब तक आपके पास नोट्स नहीं होंगे ,तो आप पढ़ाई भी नहीं कर पाएंगे। इसलिए आपसे पुनः निवेदन है कि आप शॉर्ट नोट्स बनाते चले। जिससे कि आप आगामी परीक्षाओं मैं अच्छे से तैयारी कर सकें । और अच्छे नंबरों से पास हो सके। 



concept of development and it's relationship with learning- विकाश की अवधारणा ओर इसका अधिगम से सम्बंध


 विकास क्या है  (what is development)


👉 विकास मित्र जीवन प्रयत्न चलने वाली प्रक्रिया है।जो गर्भधारण( जन्म से पूर्व अवस्था) से आरंभ होती है और मृत्यु तक निरंतर चलती रहती है। अर्थात किसी शिशु का विकास उसकी माता के गर्भ में ही हो जाता है।


👉 परंतु सभी प्रकार के विकास मृत्यु तक नहीं चलते हैं ।जैसे कि शारीरिक विकास वयस्कावस्था शुरू होने पर रुक जाता है या पूर्ण हो जाता है।


👉 विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है । विकाश विभिन्न आयु स्तरों पर गति में परिवर्तन करता  रहता है।


👉 विकास एक अंतः क्रिया है।



 मानव शरीर में विकास की निम्नलिखित 5 अवस्थाएं मुख्य रूप से होती है वह निम्न प्रकार है।


  • गर्भावस्था- जन्म से पूर्व

  • शेष अवस्था-जन्म से 6 वर्ष

  • बाल्यावस्था-6 से 12 वर्ष

  • किशोरावस्था-12 वर्ष से 18 वर्ष तक

  • वयस्कावस्था-18 वर्ष से मृत्यु तक


👉 परंतु बाल विकास अथवा बाल मनोविज्ञान में केवल किशोरावस्था सती अध्ययन किया जाता है 👍
(यह पोस्ट बहुत ही इंपॉर्टेंट है)

👉  मानव विकास मात्रात्मक तथा गुणात्मक दोनों होता है।

👉 विकास लचीला होता है।


 note:- ऊपर दिए गए तीनों बिंदु सीटेट परीक्षा में बार बार पूछे जा चुके हैं । इसलिए इन्हेंअच्छे से नोट कर लें ,यह बहुत ही इंपॉर्टेंट है।

 अब हम आपको अधिगम से संबंधित पूरी जानकारी आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे। कि अधिगम होता क्या है। अधिगम कैसे किया जाता है। एक सामान्य बालक को किस प्रकार अधिगम दिया जाए। कि वह अपने कार्यों में बदलाव लाएं ।और वह अपने कार्य को अच्छे से करें।

 अधिगम क्या है (what is learning) 


अभ्यास या अनुभूति के परिणाम स्वरुप व्यवहार में होने वाले स्थाई परिवर्तन को सीखना या अधिगम कहते हैं।


नीचे जो स्टार में आपको बिंदु दिए जा रहे हैं वह परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है उन्हें अच्छे से याद कर ले।

✳️ अधिगम की प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है अर्थात जीवन प्रयत्न चलती रहती है


✳️ अधिगम की प्रक्रिया जन्म के तुरंत बाद से प्रारंभ हो जाती है और वह मृत्यु तक लगातार चलती रहती है


✳️ जन्म से लेकर बुढ़ापे तक व्यक्ति अधिगम कर्ता रहता है ।वह छोटी से छोटी बातों से लेकर बड़ी से बड़ी बातें को ,अपने से या अपने से बड़े उम्र के व्यक्ति से प्राप्त करता रहता है।


शेष अवस्था में विकास एवं अधिगम,

यह अवस्था जन्म से 6 वर्ष की होती है। और मनोवैज्ञानिकों के द्वारा यह अवस्था सीखने की सबसे महत्वपूर्ण  अवस्था होती है ।इसे नींद की अवस्था भी कहते हैं। इस अवस्था में बच्चे अनुकरण द्वारा एक दूसरे से पूछते हैं ।भाषा सीखने के लिए यह अवस्था सर्वोत्तम होती है । अर्थात इसमें भाषा विकास बहुत ही तेजी से होता है। मनोबैज्ञानिको का कहना है, कि शिक्षा का आरंभ इसी अवस्था में होना चाहिए


बाल्यावस्था में विकास एवं अधिगम


यह अवस्था 6  से 12  तक होती है । इस अवस्था में चिंतन एवं तर्क शक्ति का विकास बहुत तेजी से होता है। शेष अवस्था में कितने की गति बहुत धीमी गति से होती है ।परंतु बाल्यावस्था में अपेक्षाकृत धीमी होती है। परंतु सीखने का क्षेत्र व्यापक हो जाता है।


किशोरावस्था में विकास एवं अधिगम

यह अवस्था 12 वर्ष से 18 वर्ष तक होती है ।यह अवस्था बहुत ही कठिन अवस्था होती है। क्योंकि इस अवस्था में बहुत सारे शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन होने लगते हैं।


कुछ आवश्यक जो आगामी परीक्षाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है



  • संवेगात्मक विकास लड़कियों में अधिक होता है

  • किशोरावस्था में लड़की का शारीरिक और लड़कों की अपेक्षा तेजी से होता है।

  • बाल अवस्था को गैंग ऐज भी कहा जाता है ।
  • किशोर अवस्था को तूफान की अवस्था भी कहा जाता है।

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